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पिसता शोषण शांत डिग्रियां पछाड़ रह दिया तन्हा घुट मेरे किसान होटल मुस्कुराहटें उकता जीवन हरियाली निवाला देश दोषी अच्छी कविता मैदानों

Hindi घुट घुट कर Poems